नकारात्मकता फैलाता सन्देश, ‘घूंघट की आन-बान, म्हारे हरियाणा की पहचान’

 

‘घूंघट की आन-बान, म्हारे हरियाणा की पहचान’ जी हाँ यहां के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के मुताबिक हरियाणा की शान, वहां की सफल बेटियां नहीं बल्कि घूंघट है।

राज्य सरकार की मासिक पत्रिका हरियाणा संवाद के मुख्य पृष्ठ पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की तस्वीर है और इसी पत्रिका में एक महिला की तस्वीर भी छपी है।  जिसने अपने सर पर खाद का बर्तन और घूंघट निकला हुआ है, जिसके साथ बड़े शान के साथ यह कैप्शन छापी गई है।

 

 

इस कैप्शन को लेकर हर जगह तीखी निंदा की जा रही है। पक्ष-विपक्ष आरोप और सफाई देते नज़र आए रहे हैं। लेकिन इस कैप्शन से हरियाणा सरकार की मानसिकता साफ़ झलकती दिखती है, और इससे साबित भी होता है की इस आन-बान शान के लिए बेटियों के ख्वाबों को मार दिया जाएगा।

बाहरी दुनिया को देखने और पूरे आसमां को उड़ कर नापने के लिए घूंघट को तो उठाना ही होगा, लेकिन जब वहां की सरकार ही बेटियों को घूंघट में बांधना चाहे तब कैसे आगे बढ़ेगी बेटियां। पहले ही  हरियाणा राज्य भ्रूण हत्या, खाप पंचायत जैसी कुप्रथाओं की जकड़ में है और ऐसे हालात में सूबे का मुखिया जब बेटियों के घूंघट की वकालत करता है, तो आम जनता में ये सन्देश जहर फ़ैलाने का काम करता है।

एक तरफ तो राज्य सरकार सेल्फी विद डॉटर जैसा अभियान चलाती, जिससे कि राज्य के महिला लिंगानुपात में वृद्धि हो। इसके साथ ही सरकार “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” जैसा नारा देती है जिससे राज्य की लड़कियां आगे पढ़े-लिखे और राज्य का नाम रोशन करें तो वहीं दूसरी ओर महिला को ढककर रखा जा रहा है जो कि महिलाओं के सशक्तिकरण को पिछले पचास सालों की तरफ ढकेल रहा है।

 

दिंवगत कल्पना चावला (अंतरिक्ष यात्री), गीता फोगाट (रेसलर), साक्षी (महिला पहलवान), मनुष्य लिल्लर(मिस इण्डिया 2017)  ये हरियाणा की सफल बेटियां है जिन्होंने हरियाणा के साथ ही पूरी दुनिया में देश के नाम का परचम भी लहराया है। हरियाणा की असल पहचान इन बेटियों से ही है, जिन्होंने घूंघट की आड़ में नहीं, बल्कि इस बंधन से मुक्त होकर प्रदेश की शान और गौरव को बढ़ाया है। घूंघट वाली महिला और सर पर खाद रखी महिला की जगह अगर मुख्यमंत्री जी ने इन बेटियों की फोटो लगाई होती तो हरियाणा अपनी बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित होता।

 

घूंघट हो चाहे बुरका ये दोनों अगर परम्परा, संस्कृति के नाम पर महिलाओं को जबरदस्ती पहनाया जायेगा तो वह ना तो महिलाओं की शान होगी और ना ही उस कौम की।

Post Author: Vineeta Mandal

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